SEBI News- अब इंडिविजुअल फ्रंट रनिंग पर शिकंजा कसेगा सेबी।

मुंबई।। मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने गैर-कानूनी ऐक्टिविटी रोकने के लिए इंडिविजुअल फ्रंट-रनिंग को फ्रॉड ऐंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज (एफयूटीपी) रेग्युलेशन के दायरे में लाने का फैसला किया है। इसके जरिए सेबी एक पुराने कानून को फिर से लाएगा, जिसे तकरीबन एक दशक पहले हटा दिया गया था। रेग्युलेटर कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (सीआईएस) को भी एफयूटीपी के दायरे में लाने की तैयारी में है। पोंजी (फर्जी) स्कीमों में पैसा गंवाने वाले निवेशकों की शिकायत के बाद सेबी ने यह फैसला लिया है।

फ्रंट-रनिंग के तहत कोई शख्स बड़े ऑर्डर के मद्देनजर गुप्त सूचना का इस्तेमाल कर किसी कंपनी के शेयर खरीदता या बेचता है, ताकि कीमतों में उतार-चढ़ाव का फायदा उठा सके। सूत्रों ने बताया कि 12 अगस्त को होने वाली बैठक में सेबी का 9 सदस्यों वाला बोर्ड कई मसलों समेत फ्रंट-रनिंग नियमों पर भी चर्चा करेगा।

सेबी के करेंट एफयूटीपी रेग्युलेशन के तहत सिर्फ इंटरमीडियरी फ्रंट रनिंग के दायरे में आते हैं, जबकि इंडिविजुअल इन्वेस्टर इससे बाहर हैं। हालांकि, फ्रंट रनिंग में शामिल इंडिविजुअल का पहला कानूनी मामले सामने आने के बाद रेग्युलेटर को इस नियम की समीक्षा के लिए मजबूर होना पड़ा है। अलायंस कॉरपोरेट लॉयर्स के मैनेजिंग पार्टनर और सेबी के एग्जेक्युटिव डायरेक्टर आर एस लूना ने बताया, ‘अगर नियम में कोई गड़बड़ी है, तो इसे दुरुस्त करने की जरूरत है, ताकि रेग्युलेटर इस मामले में शामिल किसी शख्स के खिलाफ कार्रवाई कर सके।’
सिक्यूरिटीज अपीलीय ट्राइब्यूनल ने 9 नवंबर 2012 में फ्रंट-रनिंग ऐक्टिविटी के लिए तीन लोगों पर जुर्माना लगाए जाने का फैसला खारिज कर दिया है। इसके बाद सेबी को एफयूटीपी नियमों की समीक्षा करने पर मजबूर होना पड़ा है। ट्राइब्यूनल ने कहा था कि इंटरमीडियरी के अलावा किसी शख्स पर फ्रंट-रनिंग ऐक्टिविटी पर पाबंदी से जुड़े खास प्रावधान के अभाव में रेग्युलेटर किसी शख्स को दोषी नहीं ठहरा सकता।

दिलचस्प यह है कि एफयूटीपी नियमों के तहत 1995 में किसी शख्स के भी फ्रंट-रनिंग में शामिल होने पर पाबंदी थी यानी इसके दायरे में इंडिविजुअल और इंटरमीडियरी दोनों को शामिल किया गया था। हालांकि, 2003 में इस नियम में संशोधन के बाद सिर्फ इंटरमीडियरी इसके कानून के दायरे में रह गए और इंडिविजुअल बाहर निकल गए। अब सेबी का इरादा इस गड़बड़ी को ठीक कर दोनों को इस नियम के दायरे में लाना है।

पिछले साल फ्रंट – रनिंग मामले में सैट की तरफ से सेबी का आदेश खारिज होने के बाद मार्केट रेग्युलेटर चीफ यूके सिन्हा ने कहा था कि एफयूटीपी नियम में बदलाव की जरूरत है। सूत्रों ने बताया कि एफयूटीपी नियमों केतहत उन इकाइयों की फंड जुटाने की गतिविधियों को भी फ्रॉड मानेगा , जो कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीमों कीतरह रजिस्टर्ड नहीं हैं। इससे मार्केट रेग्युलेटर को ऐसी इकाइयों पर जुर्माना लगाने में मदद मिलेगी।

 हाल केमहीनों में पोंजी स्कीमों के जरिए निवेशकों को हजारों करोड़ रुपए का चूना लगा है। Source- Navbharattimes -MLMnewsindia.com 

Written by Editor in Chief

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