फर्जी स्कीमों में डूबी राशि एक बार गई तो वापस नहीं मिलेगी!

नई दिल्ली । बहुत कम समय में धन दोगुना करने वाली स्कीमों में आप अपने जोखिम पर ही पैसा लगाएं। हो सकता है कि ऐसा झांसा देने वाले जालसाज बाद में गिरफ्त में भी आ जाएं, लेकिन इसके बावजूद आपको अपनी गाढ़ी कमाई वापस होने की गारंटी नहीं है। स्पीक एशिया और सारधा समूह की स्कीमों में पैसा लगाने वाले लोगों के साथ यही हो रहा है। दोनों घोटालों के कर्ताधर्ता पुलिस गिरफ्त में तो आ गए, मगर आम जनता की पैसा मिलना फिलहाल नामुमकिन दिख रहा है। बंगाल में राजनीतिक हड़कंप मचाने वाले सारधा समूह घोटाले की जांच से जुड़े कंपनी मामलों के मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि

निवेशकों की राशि को तलाशना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

कंपनी की तमाम परिसरों से जो कागजात जब्त किए गए हैं, उनसे कहीं भी यह सूचना नहीं मिल पा रही है कि निवेशकों की राशि कहां लगाई गई है। आशंका तो यह है कि कंपनी ने निवेशकों की जमा राशि का बहुत बड़ा हिस्सा न निवेश किया है और न ही इसका कोई हिसाब-किताब रखा है। कंपनी से सिर्फ 37 करोड़ जब्त किए गए हैं, जबकि उसे लगभग 17 लाख निवेशकों को सिर्फ मूल धन के तौर पर 1,983 करोड़ रुपये देने हैं
बंगाल, असम, उड़ीसा जैसे राज्यों से लाखों निवेशकों के लगभग दो हजार करोड़ रुपये लेकर भागी इस कंपनी के घोटाले की जांच केंद्र सरकार की दो एजेंसियां- प्रवर्तन निदेशालय और गंभीर अपराध जांच कार्यालय (एसआइएफओ) कर रही हैं। इसी तरह से फ्रॉड करने वाली एक अन्य कंपनी स्पीक एशिया के प्रमुख आरएस पाल की गिरफ्तारी के बावजूद निवेशकों को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही। दिल्ली पुलिस ने दो दिन पहले ही इसे दबोचा है। माना जाता है कि कंपनी ने आम आदमी को घर बैठे बंधीबंधाई मासिक आमदनी देने का झांसा देकर देश भर में 2,200 करोड़ रुपये का चूना लगाया है।
कंपनी मामलों के मंत्रालय ने आंतरिक तौर पर इसकी जांच काफी पहले शुरू कर दी थी। मंत्रलय के अधिकारियों का कहना है कि स्पीक एशिया ने जनता से बटोरी गई राशि को गैरकानूनी तरीके से देश से बाहर भेजा है। इसके सारे अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का ब्योरा इकट्ठा करना ही अपने आप में टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। हांगकांग, दुबई, नेपाल के जरिये भारत से पैसा बाहर भेजा गया है। अभी तक जांच एजेंसियों ने इस कंपनी के 200 बैंक खातों को जब्त किया है। इनमें सिर्फ 140 करोड़ रुपये जमा हैं। Source- jagran.com

Written by Editor in Chief

Tags: , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*

%d bloggers like this: