Chitfund News चिटफंड घोटाला।जाँच के दौरान आपस में ही उलझी हुई नजर आ रही है। सरकारी एजेन्सियाँ।

sebi नई दिल्ली यहां प्रत्येक दिन एक नई चिटफंड कम्पनी बाजार में आ रही है। और वहां आरबीआई एवं सेबी जैसी बड़ी सरकारी एजेन्सियां इन चिटफंड कम्पनियो को रोकने के उपाय करने के बजाए आपस में ही उलझी हुई है। सेबी की कार्यवाही धीमी हो गई है। वह चिटफंड कम्पनियो के खिलाफ देशभर में कार्यवाही का एकछत्र अधिकार चाहती है। और न मिलने पर नाकामियो का जिम्मेदार राज्य सरकार और सदन को मान रही है। जिसके कारण बंगाल के शारदा घोटले के बाद पोंजी स्कीम चलाने वाली कम्पनियो पर लगाम लगाने की कोशिश नाकाम होती दिख रही है।
पोंजी स्कीम के तहत आम जनता को रातोरात धनवान बनाने का ख्बाव दिखाकर लूटने वाली इन कम्पनियो पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है। अब तक अध्यादेश के जरिए पूँजी बाजार नियामक एजेंसी सेबी को जो अधिकार दिए गए थे। उनका कोई असर नही है।
सेबी के सूत्रों का कहना है कि अफसरों की कमी और राज्य सरकारों का सहयोग नही मिलने की वजह से पोंजी स्कीमों का धंधा अब फल – फूल रहा है। रिजर्व बैंक द्वारा सेबी को ५४३ ऐसी गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियो की सुची सौप दी है। इसके बाद भी अधिकांश कम्पनियो के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नही हो रही है।
सेबी अधिकारियो के अनुसार पोंजी स्कीम चलाने वाली कम्पनियो पर डंडा चलाने का अधिकार सेबी को मिला तो है लेकिन अध्यादेश के जरिये सेबी द्वारा ऐसी २५ कम्पनीयो के खिलाफ मामले दर्ज है।
पर कोई खास कार्यवाही नही हो पाई है। नियामक को इंतजार है की कब संसद में विधेयक पारित कर उसे इस संबध में पर्याप्त अधिकार दिए जाने के बाद भी पोंजी स्कीम चलाने वाली कम्पनियो पर शिकंजा कसना मुश्किल है। क्योकि सबसे बड़ी अरचन राज्यों के दोहरे नियमन की वजह से आ सकती है।
इसके अनुसार सौ करोड़ से ज्यादा का घोटाले करने वाली कम्पनियो के खिलाफ नियामक कार्यवाही कर सकेगा। मगर इसके लिए उसे राज्य सरकार की अनुमति और मदद लेनी होगी आमतौर पर पोंजी स्कीम वाली कम्पनियो के राजनितिक रसूख होते है जिसके कारण स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ कार्यवाही करना आसान नही होता है।

Written by Editor in Chief

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