पहली बार निवेशकों के हित में रमन सरकार चिटफंड घोटाले पर कारवाही कर रही है।

सरकारे चिटफंड कम्पनी को सील करने व संचालको को अरेस्ट करने में ज्यादा इंट्रेस्ड होती है। और निवेशकों का पैसा वापस करवाने के लिए कोई दबाब नही बनाती यहीं कारण है। की निवेशक अपनी शिकायत सरकार में नही करते परंतु छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले में निवेशकों के हित में काम कर रही है। सरकार कम्पनियो पर दबाब बना कर निवेशकों का पैसा वापस करवा रही है। अभी तक चार कम्पनीयो की और में १०४ लोगो के ४६ लाख रूपए वापस करवाने के बाद (एचबीएन) एनआईसीएल समेत दो और कम्पनीयो द्वारा २०० से अधिक लोगो को लगभग आधा करोड़ रूपए वापस करने की सुचना सरकारी जाँच समिति को दी है। इसकी जानकारी कलेक्टर को भी दे दी गई है। कलेक्टर द्वारा इन कम्पनियो से लोगो की सूची व वापस की गई रकम का विस्तृत विवरण माँगा है। जाँच स्थित के अध्यक्ष ने बताया की कम्पनी का कहना है कि जुलाई के अंत तक लोगो का पैसा वापस कर देगी। ऐसा नहीं हुआ तो कम्पनी पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

सरकारी जाँच समिति में अवैद्य रूप से वित्तीय लेन देन करने वाली कंपनीयो पर छापा मार कर लोगो के पैसा वापस करने के लिए दवाव बनाया है। इसके बाद ही कम्पनियो ने लोगो के पैसे वापस लौटाए कलेक्टर द्वारा बताया गया की कम्पनियो द्वारा लौटाया गया आधा करोड़ रूपए लगभग एक करोड़ के पार जाएगी। अभी तक लोगो के ४६ लाखरूपए वापस हो हो चुके है। सरकार की इस संवेदनशील कार्यवाही का विरोध भी हो रहा कुछ लोग चाहते है। कि कम्पनियो सील हो ,उसके अकाउंट सील किए जाए जब कि ऐसी कम्पनियो में अनजाने लालच में निवेश कर चुके हजारो निवेशक सरकार के इस कदम को न्यायोचित बता रहे है। और शायद इसी को पूरा न्याय कहते है जो कि समय रहते पीड़ित को मिल जाए।

Written by Editor in Chief

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